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महान भारतीय फुटबॉलर बलराम की तबीयत बिगड़ी, कोलकाता के अस्पताल में भर्ती

भारतीय फुटबॉल के दिग्गजों में से एक तुलसीदास बलराम को अचानक कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराना पडा है. 1950 और 1960 के दशक में भारतीय फुटबॉल के सबसे बड़े दिग्गजों में शामिल बलराम को गुरुवार 29 दिसंबर को मूत्र संक्रमण और पेट की समस्या के कारण शहर के एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है.

बलराम 1962 में एशियन चैंपियन बनने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे, जहां वह चुन्नी गोस्वामी और पीके बनर्जी जैसे सुपरस्टारों की टीम का हिस्सा थे.

कोलकाता के अस्पताल ने 29 दिसंबर को महान भारतीय स्ट्राइकर के स्वास्थ्य पर अपडेट दिया. अस्पताल के मे़डिकल बुलेटिन में बताया गया कि 87 साल के बलराम को बीती 26 दिसंबर को भूख नहीं लगने, पेट फूलने और मूत्र संक्रमण की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी निगरानी की जा रही है. अस्पताल ने बताया कि बलराम डॉक्टरों की एक खास टीम की देखरेख में हैं.

पश्चिम बंगाल सरकार हरकत में

1950-60 के दशक में भारत में फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने वालों में अहम भूमिका निभाने वाले बलराम के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी के पश्चिम बंगाल सरकार भी हरकत में आ गई. प्रदेश के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने उनकी देखभाल का भरोसा दिया और बीमार पूर्व फुटबॉलर से मुलाकात कर उनसे भी हर संभव मदद का वादा किया.

1962 में बनाया था एशियन चैंपियन

बलराम की गिनती भारत के महानतम फुटबॉलरों में की जाती है. जकार्ता में 1962 में एशियन गेम्स के फाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को 2-1 से हराकर दूसरी बार खिताब जीता था. भारत की जीत में बलराम ने भी बड़ी भूमिका निभाई थी. उन्होंने टूर्नामेंट में भारत का हर मैच खेला, जिसमें जापान और थाईलैंड के खिलाफ गोल भी दागे थे. इसके बाद से टीम दोबारा इस उपलब्धि को दोहरा नहीं पाई.

चुन्नी-बनर्जी-तुलसी की ‘होली ट्रिनिटी’

1936 में सिकंदराबाद (तत्कालीन हैदराबाद प्रदेश) में जन्मे बलराम ने हैदराबाद सिटी पुलिस और ईस्ट बंगाल जैसे क्लबों के लिए अपना जलवा दिखाया. उन्होंने भारत के लिए 27 मैच खेले, जिसमें 10 गोल भी दागे. वह भारतीय फुटबॉल की सुनहरी पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं जहां चुन्नी गोस्वामी और पीके बनर्जी के साथ मिलकर उन्होंने भारत की सबसे यादगार तिकड़ी बनाई, जिसे ‘होली ट्रिनिटी’ के नाम से याद किया जाता है. भारत के महान फुटबॉलरों में शामिल और बलराम के इन दोनों साथियों का 2020 में निधन हो गया था.

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