शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामला: पार्थ चटर्जी की बढ़ी मुश्किलें, और 14 दिन तक जेल हिरासत में रहने का आदेश

बंगाल के शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय एजेंसियों के हाथों गिरफ्तार राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और 14 दिनों तक जेल में ही रहेंगे।

गुरुवार को एक बार फिर उन्हें अलीपुर की विशेष सीबीआइ कोर्ट में पेश किया गया था जहां उनके अधिवक्ता सलीम रहमान ने उनके लिए जमानत की अर्जी लगाई थी। पार्थ चटर्जी के साथ-साथ इस मामले में अन्य लोगों यानी कल्याणमय‌ गांगुली, सुबीरेश भट्टाचार्य, अशोक साहा, प्रसन्न राय और प्रदीप सिंह के साथ एक और बिचौलियों को भी पेश किया गया था।

जमानत की अर्जी लगाई थी

इन सभी के अधिवक्ताओं ने जमानत की अर्जी लगाई और कहा कि केवल पूछताछ और जांच के नाम पर इन्हें लंबे समय तक जेल में रखा गया है। पार्थ के अधिवक्ता ने तो यहां तक कहा कि मेरे मुवक्किल के नाम पर प्राथमिकी तक नहीं है, बावजूद इसके सीबीआइ उन्हें बड़ा षडयंत्रकारी बता कर जेल में रख रही है। जबकि इसके पीछे कोई तर्क नहीं दे रही। इसके जवाब में सीबीआइ के अधिवक्ता ने बताया कि शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार के लिए पार्थ चटर्जी ने अपने करीबी लोगों को उन सभी महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया जिन्होंने

भ्रष्टाचार की साजिश रची।

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14 दिनों तक जेल हिरासत में रहने का आदेश

यहां तक की कई लोगों को हटाया गया, तबादले किए गए और उन्हें नियुक्ति की जिम्मेवारी सौंपी गई जो अव्वल दर्जे के भ्रष्ट अधिकारी थे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एक बार फिर कोर्ट ने पार्थ चटर्जी सहित सभी सात लोगों को और 14 दिनों तक यानी चार जनवरी तक जेल हिरासत में रखने का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि पार्थ फिलहाल प्रेसिडेंसी सेंट्रल जेल में बंद हैं। जुलाई महीने की 21 तारीख को उनके घर छापेमारी के बाद ईडी अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। उनकी महिला मित्र अर्पिता मुखर्जी के कई ठिकाने से 50 करोड़ के करीब नगदी बरामद हो चुके हैं।


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